Uma Pathak
Classics
ममता की मूरत है
जिसकी ना कोई सूरत है
दिन ढल जाए तो लगता है
जिंदगी की सबसे बड़ी जरूरत है।
ममता का तू मान रख
इसका तू सम्मान रख
ममता तो मन की है
या ना धन की है ना तन की है।
हर ओर फेली ममता की मूरत है
जिंदगी में सभी को इसकी जरूरत है।
बच्चे
एक औरत की
नायक
गरीबी
पहला प्यार
दुर्घटना
अंतरिक्ष
प्रेम
होली
पशु पक्षी और ...
दिल ढूंढता रहता उसे ! आखिर दिल चाहता है उसे तो दिल ढूंढे किसे ? दिल ढूंढता रहता उसे ! आखिर दिल चाहता है उसे तो दिल ढूंढे किसे ?
जीवन धारा बन के हिंदी, भारत में बहती जाए, है ये सबके मन में समाए, जीवन धारा बन के हिंदी, भारत में बहती जाए, है ये सबके मन में समाए,
पत्थर के हो तुम है पत्थर की काया विश्वास की आत्मा से सृष्टि बीच समाया। पत्थर के हो तुम है पत्थर की काया विश्वास की आत्मा से सृष्टि बीच समाया।
हनु फाड़ दिया शेर का जिसने, जो बचपन में खेल दिखाया थ हनु फाड़ दिया शेर का जिसने, जो बचपन में खेल दिखाया थ
पर दुष्ट कुपात्र को क्षमा कर देना, कायरता है और एक बड़ा दुर्गुण है। पर दुष्ट कुपात्र को क्षमा कर देना, कायरता है और एक बड़ा दुर्गुण है।
रात का घना अंधेरा पतला हो चला, सुबह का उजाला धीरे-धीरे बढता चला. रात का घना अंधेरा पतला हो चला, सुबह का उजाला धीरे-धीरे बढता चला.
विश्व रचियता विश्वकर्मा ने स्वर्ग बनाया सतयुग में। द्वारका बनाई द्वापर में. विश्व रचियता विश्वकर्मा ने स्वर्ग बनाया सतयुग में। द्वारका बनाई द्वापर में.
माँ कौशल्या की कोख से नृप दशरथ सुत जन्में राम। माँ कौशल्या की कोख से नृप दशरथ सुत जन्में राम।
अब तो इतना काम करना, उन्हें समझाने की तू कोशिश करना, भूल के भी कभी भूल न करना, अब तो इतना काम करना, उन्हें समझाने की तू कोशिश करना, भूल के भी कभी भूल न क...
ये हुनर भी बेवफाई का, बड़े हुस्न वाला होता है ये हुनर भी बेवफाई का, बड़े हुस्न वाला होता है
बेचारी चीटियों के लिए पानी की एक बाल्टी ही काफी है सुनामी बनने के लिए। बेचारी चीटियों के लिए पानी की एक बाल्टी ही काफी है सुनामी बनने के लिए...
कह रही हो जैसे खुशियां बटोर ले जरा आओ ये पल ये लम्हें "आज" जी लें जरा। कह रही हो जैसे खुशियां बटोर ले जरा आओ ये पल ये लम्हें "आज" जी लें जरा।
तरसती सी निगाहें लरजते से होंठ और खोया खोया सा चांद। तरसती सी निगाहें लरजते से होंठ और खोया खोया सा चांद।
एक चरण आकाश में लगा। एक चरण से फिर पृथ्वी को नापा। एक चरण आकाश में लगा। एक चरण से फिर पृथ्वी को नापा।
मृत्युपाश सदृश लगे कभी, कभी लगता लाल गुलाल। मृत्युपाश सदृश लगे कभी, कभी लगता लाल गुलाल।
मैं सरल लिखूं या क्लिष्ट लिखूं? मैं गरल लिखूं या विशिष्ट लिखूं? मैं सरल लिखूं या क्लिष्ट लिखूं? मैं गरल लिखूं या विशिष्ट लिखूं?
जैसे नदी समंदर से मिलकर असीम हो जाती है। जैसे नदी समंदर से मिलकर असीम हो जाती है।
माह सितम्बर-सत्ताईस थी, और साल उन्निस सौ सात। माह सितम्बर-सत्ताईस थी, और साल उन्निस सौ सात।
संसार मैं दुख है दुख का कारण तृष्णा है। संसार मैं दुख है दुख का कारण तृष्णा है।
मोह, माया में सभी लिप्त है, ना सेवा, समर्पित इंसान मिले | मोह, माया में सभी लिप्त है, ना सेवा, समर्पित इंसान मिले |