STORYMIRROR

Rashid Akela

Abstract

3  

Rashid Akela

Abstract

मिज़ाज़

मिज़ाज़

1 min
195

  टूटा है दिल बेशक़ पर 

  आवाज़ नहीं है।।

  छुपाऊं भी ज़माने से

  ग़हरा राज़ नहीं है।।


  ख़ुद की गलती पर है

  पछतावा

  दिल तुझसे कभी भी

   नाराज़ नहीं है।।


 और तेरी गली का रास्ता

 मैं भूल जाऊँ 

 इतनी कमजोर याददास्त

 आज नहीं है।।


 हो गया हूँ रुसवा आज

 ज़माने भर में

 इश्क़ को करु रुसवा मग़र 

 ऐसा हमारा मिजाज़ नहीं है।।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract