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SHAKTI RAO MANI

Abstract

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SHAKTI RAO MANI

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मिट्टी से आये हे मिट्टी मे मिल जाना होगा

मिट्टी से आये हे मिट्टी मे मिल जाना होगा

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मिट्टी से आये हैं मिट्टी मे मिल जाना होगा

हवा सी है जिंदगी जिस ओर ले जाए

उस ओर ही जाना होगा

पतवार हमारे हाथो मे है,तू सिर्फ रुख तय कर

कश्ती तो हमे ही चलाना होगा

आग है आँखो मे ओर आग मे ही जल जाना होगा

उड़ान अगर वास्तविक हो

तो कल्पना के साथ अनंतता मे जाना होगा

तू फिर इन तत्वो को मिला दे

तूझे फिर एक इंसान बनाना होगा

मालिक तेरे हाथो से बने हैं

तेरे हाथो मे मर जाना होगा

खूब सजाई है डोली जिंदगी की,

गर्भ से निकलकर तेरे आसरे मे ही आना होगा

कुछ नही लेकर आये थे

अब तेरा सतकार नियम लेकर जाना होगा

कमाई हे जो दौलत शौक शिंगार मे तेरे लिए

फर्क नही पडता तू मुझमे है या किसी ओर में

तेरे नाम पर ही लुटाना होगा

भिड़ पड़े हैं आपस मे तेरा ही नाम लेकर

शैतान का रुप लिए भूल गया ये मूर्ख इंसान

के तूने बनाया है ओर तुझमे ही मर जाना होगा

मिट्टी से आये हैं ओर मिट्टी मे मिल जाना होगा!


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