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SHAKTI RAO MANI

Romance Others

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SHAKTI RAO MANI

Romance Others

तुम भी

तुम भी

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ये घाव अब दवा से कहां सही होते है

दुआओं की भीड़ में एक दुआ दे जाना तुम भी।

ये घाव मैंने खुद को ही दिए है

खुद को ही दफ़न किया है खुद ही मैं

कई फरिश्ते रास्ता दिखाते है मुझे

गलती ही सही एक रास्ता दिखाना तुम भी।


कभी सामने आ जाऊं तो एक दफा देखना जरूर

तसल्ली होगी इश्क़ कभी हमारा भी कबूल था

के नजरे हटा लेना फिर नजरों से

गैर है कोई वो, और अनजान तुम भी।

क्या पता ये घाव ऐसे ही सही हो

बस गैरों की तरह गुजरू

और अनजानों की तरह गुज़र जाना तुम भी

दुआओं की भीड़ में एक दुआ दे जाना तुम भी।


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