STORYMIRROR

Versha Gupta

Abstract

2  

Versha Gupta

Abstract

मिट्टी की काया

मिट्टी की काया

1 min
341

ये मिट्टी की काया

मिट्टी में हीं मिल जानी


फिर क्यों अभिमान तुझे इंसा

इस काया पे,इसके कई रंग

बचपन,युवा और बुढ़ापा 


बचपन सब को लुभाता

अपनी कोमल काया से


युवा प्रेम के पीग बङाता

अपनी मनमोहक काया से


बुढ़ापा ढुढ़ता सहारा

अपनी मुरझाई काया से


ना कर अभिमान इंसा

समय की लाठी में बङा दम


ये नहीं रहता एक समान

मिट्टी......


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract