मिल गयी रोटी के एक टुकड़े को उस
मिल गयी रोटी के एक टुकड़े को उस
भूख आँखों से पिघलती हुई,
उनके लबों के कोने तक जब पहुंचती है,
ठहर जाती हैं एक पल को।
देख हाथों में रोटी का एक टुकड़ा
जिसे ज़िन्दगी मिलने वाली है।
ज़ायका उस टुकड़े का जल्द ही,
मुँह में अंगड़ाई लेता हुआ फिसलेगा,
डूबेगा भी, और फिर खिलखिलाएगा।
बेहता चला जाएगा उन सूखी सी ढलानों पर,
जिन्हे इंतज़ार था उसका,
कई दिन से, कई रातो से।
गौर से देखना फिर भूख की मिटती हुई हंसी।
मिटने का शोक नहीं होगा पर।
वो खुश होगी, क्योकि,
रोटी के एक टुकड़े को अभी अभी एक ज़िन्दगी मिलने वाली है।
- तरनपएक पल को
