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MUKESH KUMAR

Romance

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MUKESH KUMAR

Romance

मिज़ा पर ख़ैर बोलती है

मिज़ा पर ख़ैर बोलती है

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जब तू चुप ज्यादा रहती है

तेरी आंखें बहुत बोलती है।


गमों से शिकन तेरे चेहरे पे

लबों पे मुस्कान बोलती है।


सुर्ख़ गालों पर लौ है कोई

तुर्फ़ा सवालों पर बोलती है।


ज़ख़्म–ए–कारी में बैठी है

पर्दा–दारी में न बोलती है।


रज़ा–मंद है तू तो मेरे से

मिज़ा पर ख़ैर बोलती है।


टूक ग़म में क्यूं रोती है

हूक दिल में यूं बोलती है।


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