महादेव का विवाह
महादेव का विवाह
महादेव के विवाह की कुछ पंक्तियां प्रस्तुत है.।।
भोले भंडारी जिनकी महिमा है न्यारी
देवों के देव महादेव कंठ में विष धारी
भोले बाबा की बारात को सजाया हैं
भस्म रूपी श्रंगार बाबा को लगाया हैं
तीनों लोकों के स्वामी को दूल्हा बनाया है
गले में साँपों की माला को पहनाया हैं
कानों में बिच्छू के कुंडल सर पर चांद सजाया है
नंदी महाराज को अपना वाहन बनाया है
भोले बाबा की बारात में हो रहा अजब गजब निराला
भूत पिशाच के संग सारे देवों को बाराती बना डाला है
हो के नंदी पर सवार पहुंचे बारात लेकर द्वार
नगर वासियों के होश उड़ा डाला है भूत प्रेतों को बराती बना डाला है
मईया की माता स्वागत थाल सजाई है देख दूल्हे को देख वो भी घबराई हैं....
देवों ने बतलाया है मईया ने वर्षों के तप से महादेव को पाया ....
ऐसी बारात न कोई ले गया न कोई ले जा पाएगा
भूतों को अपना बाराती भला कौन देव बनाएगा
मईया तो मुस्कुराई है मंडप में हंसते हंसते वो आई है
महादेव ने स्वीकारा है मनमोहक दृश्य जग को दिखलाया है
कितनी प्यारी जोड़ी है भोले संग मईया भी भोली है
विवाह का अर्थ समझाया हैं महादेव ने गृहस्थ जीवन अपनाया है...
