STORYMIRROR

Prateek Kansal

Abstract

2  

Prateek Kansal

Abstract

मेरी तमन्ना

मेरी तमन्ना

1 min
215

पंख फैलाए उड़ना चाहूँ,

उड़कर छूना है आसमान 

नील गगन में मुक्त तौर से,

करनी है धरती की परिक्रमा 

रोज़-रोज़ की दौड़ भाग से

अपना साथ छुड़ाना है 

और अपनों के दिलों में एक

छोटा सा घर बनाना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract