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Prateek Kansal

Abstract

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Prateek Kansal

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मेरी तमन्ना

मेरी तमन्ना

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पंख फैलाए उड़ना चाहूँ,

उड़कर छूना है आसमान 

नील गगन में मुक्त तौर से,

करनी है धरती की परिक्रमा 

रोज़-रोज़ की दौड़ भाग से

अपना साथ छुड़ाना है 

और अपनों के दिलों में एक

छोटा सा घर बनाना है।


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