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अनिल कुमार निश्छल

Romance

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अनिल कुमार निश्छल

Romance

मेरी क़िस्मत हो गए

मेरी क़िस्मत हो गए

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अजनबी बन के आए थे तुम

और मेरी किस्मत हो गए


रब से मांगी थी दुआ एक 

उसकी मुझ पे रहमत हो गए।


साथ मिला हमनशीं तुम्हारा

हम इश्क की इबारत हो गए।


रूठते हो तो अच्छा है थोड़ा सा

लब तेरे हँसी की इजाज़त हो गए


इक नज़र ही काफ़ी है महफ़िल में

भरी बज़्म में नज़रे इनायत हो गए


हँसी खुशी गुजार लेंगे जिंदगी

गर 'निश्छल' मेरी मोहब्बत हो गए



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