Vinay Panda
Comedy
मेरी बीवी का व्यवहार
अथवा यह उसका
प्यार समझो
जो मुझे आलसी
इतना बड़ा
निकम्मा बनाया कि
दो दिन से एक कम्बल में
मैं सिकुड़ रहा हूँ..!
जानते हो क्यूँ.. ?
डर, रजाई चौपत
सुबह-सुबह कौन करे !
हिंदुस्तान की...
क़लम तू लिखती ...
झुकना मत कभी
बेरोज़गारी में...
भारत माँ के व...
राखी
प्रेम का अनुब...
मेहरारू मतलब ...
जल है तो जीवन...
मन
शोर सुनकर घर से निकली अपनी ताई कमला। शोर सुनकर घर से निकली अपनी ताई कमला।
उस कुर्सी को पाने का कर्ज मैं चुकाये जा रही हूँ उस कुर्सी को पाने का कर्ज मैं चुकाये जा रही हूँ
उन्हें रंग खेलना, गले मिलना भी सिखाना। उन्हें रंग खेलना, गले मिलना भी सिखाना।
फूटी कौड़ी नहीं, तब हर बंदा ठंठन-गोपाल फूटी कौड़ी नहीं, तब हर बंदा ठंठन-गोपाल
इतने में आगे कुछ हुआ, मेरे कानों से निकल गया धुआँ। इतने में आगे कुछ हुआ, मेरे कानों से निकल गया धुआँ।
आम बजट में मेरी ओर ध्यान ही नहीं दिया, आम बजट में मेरी ओर ध्यान ही नहीं दिया,
कोई कविता लिखता है, कोई कहानी लिखता है, कोई कविता लिखता है, कोई कहानी लिखता है,
बनावटी 'हँसी' का खुराक भर रहा है बनावटी 'हँसी' का खुराक भर रहा है
सामाजिकता की बात करे, एकता की बात करे, सामाजिकता की बात करे, एकता की बात करे,
उन तथाकथित अमीरों की चाल-ढाल ही कुछ अलग है...! उन तथाकथित अमीरों की चाल-ढाल ही कुछ अलग है...!
उनकी 'कलम' की ताक़त बेशक़ तलवार की धार से भी बढ़कर है...! उनकी 'कलम' की ताक़त बेशक़ तलवार की धार से भी बढ़कर है...!
संसद की कार्यवाही में बाधा डालना है, विरोध प्रदर्शन, सच्चे झूठे आरोप लगाना है, संसद की कार्यवाही में बाधा डालना है, विरोध प्रदर्शन, सच्चे झूठे आरोप लगाना है...
मगर आज का असल मुद्दा -- जो कि सिर्फ रुपये और बेशुमार रुपये हैं, मगर आज का असल मुद्दा -- जो कि सिर्फ रुपये और बेशुमार रुपये हैं,
शिक्षकों को निराश एवं निरुत्साहित करते हैं शिक्षकों को निराश एवं निरुत्साहित करते हैं
वोट के समय किए वादे बड़े बड़े, बाद में दिखाई अपनी बेहयाई। वोट के समय किए वादे बड़े बड़े, बाद में दिखाई अपनी बेहयाई।
हालांकि चाय के बारे में सोचना अच्छी बात नहीं है हालांकि चाय के बारे में सोचना अच्छी बात नहीं है
बल्कि निरंतर अभ्यास एवं निष्ठा भाव से अपना दायित्व निभाया करते हैं बल्कि निरंतर अभ्यास एवं निष्ठा भाव से अपना दायित्व निभाया करते हैं
इंजन का बोझ ना रे ये तो वोटों को तोलें। इंजन का बोझ ना रे ये तो वोटों को तोलें।
वो तो मौसम की तरह बदल जाया करते हैं. वो तो मौसम की तरह बदल जाया करते हैं.
पल दो पल भी टिक ना पाए, ये कैसी इश्क़-मोहब्बत है। पल दो पल भी टिक ना पाए, ये कैसी इश्क़-मोहब्बत है।