Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!
Exclusive FREE session on RIG VEDA for you, Register now!

Anita Mishra

Classics


2  

Anita Mishra

Classics


मेरे मित्र बन कर रहना

मेरे मित्र बन कर रहना

1 min 264 1 min 264

ना लेना ना देना ना स्वार्थ

ना लालच एक रिश्ता,

मेरे मित्र बनकर रहना।


ना द्वेष ना अंहकार

ना अभिमान सबसे परे,

मेरे दोस्त बनकर रहना।


ना परिभाषा ना अभिलाषा

ना अपेक्षा कोई चाहत नहीं,

बस मेरे मित्र बनकर रहना।


ना जवाब ना सवाल

ना बवाल कुछ नहीं चाहिए,

बस मेरे दोस्त बनकर रहना।


ना समर्पण ना आकर्षण

ना परिवर्तन जैसे हो वैसे ही,

बस मेरे मित्र बनकर रहना।


Rate this content
Log in

More hindi poem from Anita Mishra

Similar hindi poem from Classics