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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

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संजय असवाल "नूतन"

Abstract Inspirational Others

मेरे कान्हा...!

मेरे कान्हा...!

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कस्तूरी तिलक 

सुशोभित मस्तक पर

वक्ष कौस्तुभ मणि विराजत है,

नाक में मोती

हाथ में बांसुरी

कलाई में कंगन धारत है।

देह सुगंधित

चंदन लगेयों 

बातों से रस घोलत है,

कंठ मुक्ताहार विभूषित

हे हरि ! हे गिरधर !

गैयन रहो चरोवत है।।

पांव में पैजनियां 

बाजत छम छम, 

गोपियों संग रास रचावत है,

मीरा के प्रभु

हे ..! गिरिधर नागर,

जमुना के तीरे 

बंशी बजावत है।

कैसे पूजूं 

हे गोपाल मैं तुझको

हे मोर मुकुट धारी, 

ग्वाल बाल संग खेलत 

यशोदा के लाल

हे.! परमावतार चक्रधारी।।

रात दिन जपूं मैं कान्हा 

तेरी ही छवि निहारूं

अपने ही सपनन में,

देख तेरी मोहनी सूरत 

अब मैं भला किसे बिचारूं

बंध गया मैं तेरे बंधन में।

हे.! मुक्ति प्रदाता ..

हे ! गोपाल हे ! हरि हर

सभी दुखों का हमारे नाश करो,

जीवन मरण से हमें मुक्ति दिलाकर 

भव सागर में बेड़ा

हमारे पार करो।।


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