STORYMIRROR

प्रवीन शर्मा

Classics Inspirational

3  

प्रवीन शर्मा

Classics Inspirational

मेरे बाबू जी

मेरे बाबू जी

1 min
253

जिसके बिना मेरा नाम अधूरा

जिसके साथ मेरा परिवार पूरा


वो छत है बाकी सब दीवारें है

एक उसने पूरे घर के सपने सँवारे है


वो माँ से कम दिखते है घर मे

कितना कुछ कह देते है छोटी छोटी बातों में


उनके हाथों से बहुत मार खाई है

सख्ती में भी उनके प्यार की मिठाई है


बहन को कितना ज्यादा प्यार जताते है

इसी तरह नारी की इज्जत करना सिखाते है


कुछ पैसो को देने के लिये कितना टहलाते है

दुनिया मे पैसो की अहमियत इसी तरह बताते है


उन्हें कुछ पता नही होता, पूछते है शाम को माँ से

फिर भी बचा लेते है, इस काटो भरे जहाँ से


और कुछ नहीं बस कहना इतना है

मुझे बड़े होकर बस उनके जैसा बनना है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Classics