मेरे अस्तित्व की कहानी
मेरे अस्तित्व की कहानी
आओ एक कहानी सुनते हैं
परी जगत नहीं हकीकत से मिलते हैं
जीवन से किसे नहीं प्यार है !
खुद में पलती ज़िन्दगी का तो एहसास ही न्यारा है
यूं ही हस्ती खिलखिला रही थी मां
मेरे आने की खुशी में कुछ अलग सी लग रही थी मां
घर सजावट से झलक रहा था
आंगन लोगों के शोर से गूंज रहा था
ऐसा जश्न घर में पहली बार था
आखिर मैं जो आने वाला था
मेरे रोने पे सब खुश थे
बेटे की आने की खुशी में सब मदहोश जो थे
पता नहीं ये दुनिया कब बदलेगी
कबतक यूं लिंग में भेद भाव करेगी
मेरी मां सबसे अलग लग रही थी
भेदभाव की भावना से परे वो प्रेम की मूर्ति थी
मैं अब बड़ा होने लगा था
घर दुनिया थोड़ा थोड़ा समझने लगा था
कुछ तो ऐसा था जो मुझमें अलग सा था
ना जाने क्यों ऐसा महसूस होने लगा था
मां के आंचल से प्रेम तो अपार था
पर अब उस आंचल में लिपटना महफूज़ लगता था
पहले पहल तो पसंद थी फिर आदत सी बन गई
ना जाने कब बहन कि वेशभूषा की लत सी लग गई
शुरू में घरवाले परिधान पे हंसते थे
बाद में वो हंसी अत्याचार में बदलने लगी
कैसे समझाऊं मैं अब सबको
दिखने में अलग हूं पर मुझमें एक औरत बस्ती है
अत्याचार की मात्रा दिन ब दिन बढ़ने लगी थी
कभी झाड़ फूंक तो कभी तांत्रिक के प्रहार से गुजर रही थी
हाए कितना चिल्लाती थी मैं
कितनी गुहार लगाती थी मैं
कलंकित बताया मां के कोख को मेरी
और आक्षेप कर कहते - क्या औकात है तेरी!
ये मेरे कर्मों का फल या मेरी फूटी किस्मत थी
इन सब हालातों में मैं खुद को कोसने लगी थी
क्या मेरा पैदा होना पाप है
क्या मेरा जीवन एक अभिशाप है
ये किस गलती की सजा मिली है
जहां किन्नर होना एक अपराध है
हां मैं एक किन्नर हूं
मैं स्त्रियों सी सजती संवरती हूं
मेरा अस्तित्व जान मुझे सबने ठुकराया
मां बाप सब हैं मेरे पर मुझे अनाथ बनाया
बेसहारा अकेले सड़कों पे भटकते एक वक़्त आया
मुझे सहारा व रहने का ठिकाना मिल गया
मैं अब खुल के जीने लगी
नए अपनों के बीच मैं घुलने मिलने लगी
फिर आया खुशी का मौसम
जब वक़्त लाया अस्तित्व स्वीकृति का पैगाम
अब तो संविधान भी बदल गया
ना जाने कब ये समाज बदलेगा
हमारी उपस्तिथि को शुभ तो मानते हैं
पर फिर उसी अस्तित्व के जन्म को अशुभ बताते हैं
खास अवसर व मौकों पर खूब सम्मान करते हैं
फिर कहीं हमारे आशीर्वाद को सर्वश्रेष्ठ मानते हैं
ग़म है दिल में पर खुशी अब स्वीकार है
नर नारी के देश में हमारा भी अधिकार है
मेरे घर होता अब हर दिन नया पर्व है
मुझे मेरे अस्तित्व पर बहुत गर्व है ।
