Ashutosh Seth
Tragedy
आज मैने हर इंसान को डरा सा देखा
आज मैने अपने शहर को वीरान देखा
कुछ तो जरुर बदला है इन हवाओं मे,
मैने आज इंसानो को उनके घरों मे,
और पंछियों को उनके घरों मे देखा।
मेरा शहर
नाराज़
शुक्रिया
बनती रही, छुपती रही, मेरी झिझकती आवाज़ बनती रही, छुपती रही, मेरी झिझकती आवाज़
दुनिया में सबसे पाक तेरा प्यार है सबसे कीमती तेरा साथ है दुनिया में सबसे पाक तेरा प्यार है सबसे कीमती तेरा साथ है
आजकल वो बहुत बदलने लगे हैं, नजदीकियों के साए में दूर होने लगे हैं। आजकल वो बहुत बदलने लगे हैं, नजदीकियों के साए में दूर होने लगे हैं।
अगर फूलों से दोस्ती निभा नहीं सकते, तो कांटों को दोस्त बनाने का क्या फ़ायदा। अगर फूलों से दोस्ती निभा नहीं सकते, तो कांटों को दोस्त बनाने का क्या फ़ायदा।
वक़्त गुज़रता गया और हमारे बीच दूरियाँ भी बढ़ती गईं! वक़्त गुज़रता गया और हमारे बीच दूरियाँ भी बढ़ती गईं!
प्यार पंछी को उड़ान से रोक ले भ्रम नहीं करते, प्यार पंछी को उड़ान से रोक ले भ्रम नहीं करते,
चेहरे पर मुस्कुराहट का मुखौटा लगाए हर कंधा अपनी शक्ति से ऊपर कुछ बोझ उठा रहा है चेहरे पर मुस्कुराहट का मुखौटा लगाए हर कंधा अपनी शक्ति से ऊपर कुछ बोझ उठा...
उमर भर का जो दर्द दिया है तुमने मैं सह रही हूं या सहना चाहती हूं उमर भर का जो दर्द दिया है तुमने मैं सह रही हूं या सहना चाहती हूं
कैसा है ये खालीपन हमें अधूरा क्यों बनाया गया? कैसा है ये खालीपन हमें अधूरा क्यों बनाया गया?
लम्हे जिंदगी के कुछ किस्से कुछ कहानी हो गऐ। कहे भी तो कैसे किस्से तो सदियों पुराने लम्हे जिंदगी के कुछ किस्से कुछ कहानी हो गऐ। कहे भी तो कैसे किस्से तो सदिय...
ज़ाया ही जाती रही ज़िन्दगी की जद्दोज़हद ना नींद ही पूरी ली कभी, ना ख्वाब ही पूरे कर ज़ाया ही जाती रही ज़िन्दगी की जद्दोज़हद ना नींद ही पूरी ली कभी, ना ख्वाब ही...
मां कहां है तू मेरे पास आ अपने गोद में सुला! मां कहां है तू मेरे पास आ अपने गोद में सुला!
कोई जो मुझे आजमाना चाहता है पर मेरा साथ पाने की फुर्सत किसे है कोई जो मुझे आजमाना चाहता है पर मेरा साथ पाने की फुर्सत किसे है
एक दिन उम्मीदें भी उम्मीद करते-करते, आखिर ख़त्म हो गईं एक दिन उम्मीदें भी उम्मीद करते-करते, आखिर ख़त्म हो गईं
प्यार में इतने गम सह न सका, किस्सा बेवफाई का कह न सका! प्यार में इतने गम सह न सका, किस्सा बेवफाई का कह न सका!
धरती बोली, क्या कहूं, इंसान की बात मुझे शर्म आई धरती बोली, क्या कहूं, इंसान की बात मुझे शर्म आई
बहुत याद आते हैं वें लम्हे, जो बिताए थे संग हमने, बड़े रंगीन थे वें लम्हे, भरे थे जिनमें रंग हमने... बहुत याद आते हैं वें लम्हे, जो बिताए थे संग हमने, बड़े रंगीन थे वें लम्हे, भर...
कमज़ोर इंसान को मजबूत और मजबूत को कमज़ोर बना जाती है! कमज़ोर इंसान को मजबूत और मजबूत को कमज़ोर बना जाती है!
तेरे जाने के बाद अंधेरे सायों मे सिमटी ना धूप थी ना छाँव थी! तेरे जाने के बाद अंधेरे सायों मे सिमटी ना धूप थी ना छाँव थी!
पर अपनी धरती पुकारती थी कुछ करेंगे हम, ये निहारती थी पर अपनी धरती पुकारती थी कुछ करेंगे हम, ये निहारती थी