STORYMIRROR

Ashutosh Seth

Tragedy

2  

Ashutosh Seth

Tragedy

मेरा शहर

मेरा शहर

1 min
96

आज मैने हर इंसान को डरा सा देखा

आज मैने अपने शहर को वीरान देखा

कुछ तो जरुर बदला है इन हवाओं मे,

मैने आज इंसानो को उनके घरों मे,

और पंछियों को उनके घरों मे देखा।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Tragedy