मेरा नन्हा फरिश्ता
मेरा नन्हा फरिश्ता
पालने में सोया मेरा ये नन्हा फरिश्ता
माँ रही एकटक निहार कैसा ये रिश्ता ?
मेरी आत्मा का अभिन्न, तन से सृजित
हो रही पुलक मन में,भाव ऐसा गर्वित
पालने में लालना आंचल में है झूलाती
कभी हाथों को ही सुंदर पालना बनाती
देती सुला अपने लाल को,
पूंछो हाल ना मां है वह कहीं भी
सुलाती सृज पालना
गाकर सुना मीठी लोरी,निंदिया बुलाती
स्वप्नों में ही देश परियों के,पहुंचा जाती
कभी पेड़ ,कभी खाट,साड़ी से हिलाती
कभी लिटा अपने पेट में,झूला झुलाती
आज भी याद वह सुनी-अनसुनी लोरी
बंधी आज भी अटूट स्नेहरस पगी डोरी
सपनों की डोर बंधी पलकों का पालना
सोजा मेरे राजा बेटा कहना ना टालना
जो रात में जल्दी सोये सुबह को जागे
पढ़ने में हो आगे,आलस भीउससे भागे
सो गया, सो गया, देखो मेराराजा सोगया
परियों के देश पहुंच सपनों में! खो गया।
