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Writer Nishant

Tragedy Action

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Writer Nishant

Tragedy Action

मेरा क्या हैं जी झोला उठाऊँगा .....

मेरा क्या हैं जी झोला उठाऊँगा .....

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'तेरी भी चुप मेरी भी ...

तू तेरा देखा ,

क्या इरादा नेक ?

यूं ही खाते रहो जी भर के ...


कौन सा कानून ...

क्या सच ,क्या झूठ

क्या देश कौन सा राजधर्म

हम कहे वही सच ..


ना कोई हिसाब दिखाऊंगा

ना किसी का कुछ सुनूंगा

जो जी में आये वही करूंगा

चिल्लाते रहो मैं ना मानूंगा


चाहे कुछ भी हो अंजाम

मैं तो हूँ मन का राजा

मन की बाते करूंगा

मेरा क्या हैं जी झोला उठाऊँगा ......


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