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Writer Nishant

Tragedy

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Writer Nishant

Tragedy

डुब मरो चुल्लू भर पानी में

डुब मरो चुल्लू भर पानी में

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घर में राशन है ना सुकून

बच्चों की फीस भरूँ अब कैसे 

पेट में चूहे दौड़ रहे और

खाली डिब्बे खनक रहे है


नमक है ना मिर्च मसाला

मोबाइल में रीचार्ज नहीं

बूढ़े माँ – बाप की दवा पानी

बिटिया भी हो गई अब सयानी


पढ़ा लिखा होनहार बेटा बेकार बैठा है

सबकुछ चंगा सा विश्वगुरु 3 ट्रीलीयन इकॉनॉमी

के कगार पर अम्रुतकाल बस्स ...चॅनलोपरही

करे भी तो क्या करे भाई आखीर....


अंदर से आवाज अजि सुनते हो

गॅस खतम, राशन का पता नही

साहब बैठे है बड़ी शान से बेफीकर

कुछ तो करो या डुब मरो चुल्लू भर पानी में


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