STORYMIRROR

Writer Nishant

Tragedy Action

4  

Writer Nishant

Tragedy Action

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...

1 min
226

कहते हैं कभी तुम बोला करते थे

ना किसी से डरते थे ना जुल्म सहते थे

आजकल तुम कुछ गुमसुम रहते हो

चुपचाप जुल्म सहते हो उपर से हँसते रहते हो


सुना हैं तुम आजकल दिल खोलकर बोलते नहीं

ठहाके लगाकर हँसते नहीं , गले लगाकर मिलते नहीं

मुझे तो शक हैं की तुम वही इंसान हैं की चलता फिरता मुर्दा

कब तक सहोगे , आखिर कब तक चुप रहोगे


माना की तुम पढ़े लिखे हो बेशक

मगर तुम आदमी हो शैतान नहीं

तेरा भी दिल धड़कता होगा लेकिन

तुझे भी जरूरी हैं उसे दिखाना होगा


इतना सब कुछ बिगड़ गया

फिर भी तू गहरी नींद में सोया

या तुझे देश भविष्य के बारे में

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Tragedy