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Writer Nishant

Tragedy Action

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Writer Nishant

Tragedy Action

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...

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कहते हैं कभी तुम बोला करते थे

ना किसी से डरते थे ना जुल्म सहते थे

आजकल तुम कुछ गुमसुम रहते हो

चुपचाप जुल्म सहते हो उपर से हँसते रहते हो


सुना हैं तुम आजकल दिल खोलकर बोलते नहीं

ठहाके लगाकर हँसते नहीं , गले लगाकर मिलते नहीं

मुझे तो शक हैं की तुम वही इंसान हैं की चलता फिरता मुर्दा

कब तक सहोगे , आखिर कब तक चुप रहोगे


माना की तुम पढ़े लिखे हो बेशक

मगर तुम आदमी हो शैतान नहीं

तेरा भी दिल धड़कता होगा लेकिन

तुझे भी जरूरी हैं उसे दिखाना होगा


इतना सब कुछ बिगड़ गया

फिर भी तू गहरी नींद में सोया

या तुझे देश भविष्य के बारे में

जैसे कुछ नहीं लेना देना ही नहीं...


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