मेरा इश्क़ और फ़रवरी
मेरा इश्क़ और फ़रवरी
फ़रवरी की कमसिन हवाएँ,
जब बालों को तेरे सहलाती हैं,
तेरी यादों की परछाइयाँ,
दिल पे दस्तक ले आती हैं।
ओस में भीगे जज़्बात मेरे,
चाँदनी रात में चमक उठते हैं,
तेरी हँसी की गर्मी से,
ठिठुरते लम्हे भी पिघल उठते हैं।
रंगों से भीगी शामों में,
जब सूरज मंद पड़ने लगता है,
आँखों का तेरा जादू फिर
अंधियारे में रोशनी करने लगता है।
हाथों में हाथ हो तेरा,
हल्की बारिश की बूँदें हों,
बसंत की पहली ख़ुशबू में,
कुछ मीठे लम्हे गूँजे हों।
फ़रवरी का हर दिन मेरा,
बस तेरी बाहों में कट जाए,
मेरा इश्क़ और फ़रवरी,
बस तेरे आंखों में बस जाए।

