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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

मेहनत की जीत

मेहनत की जीत

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जीत तो आखिरकार मेहनत की हुई है

बरसों बाद ही सही पर मुराद पूरी हुई है

बहुत सताया,बहुत डराया इस भाग्य ने,

जय आखिरकार श्रम-किरणों की हुई है


वर्षों तक रोया,कहीं आंसूओ को खोया,

प्यास आखिर श्रम-आंसू से पूरी हुई है

सबने विपत्तिकाल मे बड़ा ही डराया है,

तेरा अभी तक नम्बर क्यों नही आया है?


यूँ ही हमदर्दीवालों की बोलती बंद हुई है

जीत तो आखिरकार मेहनत की हुई है

दिल से धन्यवाद जिन्होंने साथ निभाया,

विपत्तिकाल में भी मुझे गले से लगाया,


दोस्तों की दुआओं की आज जीत हुई है

मेरी पत्थर की किस्मत आज स्वर्ण हुई है

बड़ो के आशीर्वाद की आज छाया हुई है

मेरी भी सरकारी नोकरी अब दुल्हन हुई है


इस संघर्षकाल में मैंने तो यही सीखा है,

लगातार कर्म से दरिया भी होता छोटा है

लगातार कर्म से पत्थरों पे निशानी हुई है

मरुभूमि में बरसों बाद आज वर्षा हुई है


जीत तो आखिरकार मेहनत की हुई है

बरसों बाद ही सही पर मुराद पूरी हुई है

आज लगातार परिश्रम करने के कारण,

इस गुदड़ी के लाल की अब विजय हुई है


लगातार पथ पे चलनेवाले इस पथिक को,

आज सालों बाद मंजिल की प्राप्ति हुई है

ये सब्र का फल तो बड़ा ही मीठा होता है,

ये कहावत आज मुझ पे चरितार्थ हुई है।


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