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Surendra kumar singh

Abstract

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Surendra kumar singh

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मौसम। 5

मौसम। 5

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नये प्रेम का नया मौसम है यहाँ

तुम्हारे अपने प्रतिबिंब की तरह।

तुम्हारा दुनिया मे आना

कुछ पल जीना

और फिर चले जाना।


इस काल की कहानियों में

खोया हुआ है तुम्हारा आना

एक बार फिर आना।

फिर भी इस दुनिया में

हो तुम

और तुम्हारी छोटी सी दुनिया भी।


वायदों का करारा टूटा है

विश्वास की बाढ़ है

और इस बाढ़ में

तुम्हारे होने की कहानियां है

काश इस विश्वास में शामिल होता


तुम्हारा फिर आने का वायदा

सचमुच मूर्तियां

अपने घरों से निकल निकल कर

नाच रही हैं तुम्हारे साथ साथ

और मंदिरों में भीड़ बढ़ती जा रही है।


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