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Mayank Kumar

Abstract

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Mayank Kumar

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मैंने सुना हैं

मैंने सुना हैं

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सुना है पर्वत के रोदन को मैंने

जब नदियां आंख मिचौली खेलती थी


कुछ दूर तक पर्वत के संग रह कर

उसका साथ अचानक छोड़ती थी


उस वक्त पर्वत के व्याकुलता को,

मैंने महसूस किया था !


अजीब स्थिति थी उस रोज

जब पर्वत रोदन कर रहा था


नदियों के बिछड़न को सह रहा था

उस रोज आकाश में बादल को भी,

मैंने व्याकुल होते देखा था।


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