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Deepali Mathane

Romance

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Deepali Mathane

Romance

मैं टूट भी जाऊ तो क्या...

मैं टूट भी जाऊ तो क्या...

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मैं टूट भी जाऊँ तो क्या तुम मुझे संभाल पाओगे

बिखरे मेरे अहसासों को सिमट के तुम लाओगे


अधमरी सी कुछ ख़्वाहिशों को प्राण फूक के बचाओगे

बेहतरीन ज़िंदगी के मेरे कुछ लमहें हसींन सजाओगे


छेड के दिल-ए-साज़ का तराना मेरे लिए गाओगे

रूठी हुई खुशियों को मनाने क्या मेरे लिए आओगे


बनके मेरे प्यार की ताबीर सुहाना सपना मेरा लाओगे

तहरीर-ए-ख़ास बन के मेरे अल्फ़ाज़ो में चुपके से समाओगे


मैं टूट भी जाऊँ तो क्या अपने प्यार के वादों से मुझे बहलाओगे

काँटों की डगर सूनी पडी बगीयाँ को अपनें वज़ूद से महकाओगे।


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