STORYMIRROR

आचार्य आशीष पाण्डेय

Fantasy

3  

आचार्य आशीष पाण्डेय

Fantasy

मैं किन्नर हूं

मैं किन्नर हूं

1 min
182

मैं किन्नर हूं किन्तु 

जगत से पूजित हूं 


मैं रूप अनेकों हूं धरता

मैं राज सतत जग पर करता

मेरी कोई अभिज्ञान नहीं

मैं हर मुख में गूजित हूं


एक जगह पर केवल न

है जगह जगह पर धाक मेरी

अधिकार कोई न कर सकता

स्वच्छंद विहग मैं कूजित हूं


करूं कृपा मैं जिस पर भी

परिपूर्ण करूं धन धान्य उसे

फिर शेष कोई ऐश्वर्य नहीं

मैं उत्तम हूं किन्तु शापित हूं।।



Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Fantasy