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Priyesh Pal

Abstract

4.5  

Priyesh Pal

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मैं एक सुंदर शहर में रहता हूँ

मैं एक सुंदर शहर में रहता हूँ

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478


मैं एक बहुत ही सुंदर शहर में रहता हूँ।

हाँ सचमुच,

बहुत सुन्दर।


यहाँ के बाशिंदे

बड़े समझदार हैं।


हाँ वे सब एक ही पंथ के नहीं हैं,

लेकिन एकसाथ मिलकर रहते हैं।


उनके बीच अपने अपने पंथों की,

अच्छाईयों का आदान प्रदान है।


इन्हें धर्म के पालन 

और धर्म के पाखंड 

के बीच का अंतर समझ आ गया है।

इसलिए अब यहाँ मस्ज़िद की अज़ान

जो मशीनी उपकरण की वजह से शोर लगने लगी थी

पहले की तरह सुरमयी लगती है

ठीक वैसी ही,

जैसे मेरे बचपन में लगती थी।

और यहाँ दीपावली भी

दीपमयी प्यारी और सुंदर हो गयी है,

भयानक पटाखों के शोर सी नहीं।


यहाँ पर लोग पड़ोसियों से झगड़ते नहीं हैं,

न ही इनके घरों,

मुहल्लों के बीच कोई सरहद है

और न सरहद की लड़ाई।

जिसका फ़ायदा ये है 

कि रक्षा बजट के नाम 

जो धन बर्बाद होता था

अब अन्य सेवाओं को दुरुस्त करने के काम आ रहा है।


यहाँ के बाशिंदे सिर्फ़ इंसानी क़ौम ही नहीं,

वरन पशुओं और पर्यावरण का भी बख़ूबी ध्यान रखते हैं।


इन्हें पता है,

कि धरती सबके लिए है।

इसलिए इन सभी लोगों ने,

इंसानों की बढ़ती संख्या को क़ाबू करने के

कभी न पूरा होते दिखते सपने को सच कर दिया है,

और अब इस शहर की धरती पर संतुलन है।


यहाँ के बाशिंदों को अब उच्च जीवनशैली का 

असल मतलब समझ आ गया है।


और इसलिए अब यहाँ घरों से,

ऐसे उपकरणों को हटा दिया गया है

जो मनुष्य को उच्च वर्ग का एहसास कराते हुए

बासा खाने को प्रेरित तो करती थी ही

साथ ही पर्यावरण को भी नुकसान पहुँचाती थी।


अब यहाँ के लोग ताज़ा उगाते हैं,

ताज़ा खाते हैं।


यहाँ पर अब मोटर गाड़ियों का उपयोग सीमित हो गया है

क्योंकि यहाँ पर लोग बख़ूबी जानते हैं 

कि हमें स्वस्थ वायु की कितनी आवश्यकता है,

इसलिए वे साईकल पर आ गए हैं

और ज़रूरत पड़ने पर

यात्री वाहनों का प्रयोग करते हैं

जो यहाँ की हुक़ूमत ने बहुत ही सलीके से

संचालित किया है।


ये शहर सचमुच बहुत सुंदर है,

जहाँ मैं रहता हूँ

और यहाँ के बाशिंदे बेहद समझदार।


आप आईयेगा ज़रूर मेरे शहर,

मुझसे मिलने,

मैं पता भेजता हूँ


ये शहर

मेरी कल्पना के मध्य,

मेरे हृदय की राजधानी है।


हाँ, 

ऐसे नगर सिर्फ़ कल्पना में ही हो सकते हैं।


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