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सोनी गुप्ता

Abstract

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सोनी गुप्ता

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मैं ब्रह्मांड सी

मैं ब्रह्मांड सी

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पृथ्वीमंडल के शैलखण्ड पर धरा का अस्तित्व है,

रवि रौद्र को सहकर भी जो रूप धरा का मुस्काता है,

मैं हर परिस्तिथिति को सहज स्वीकार कर जाती हूँ,

उसी तरह अपने परिवार के लिए मैं उस ब्रह्माण्ड-सी हूँI


पतझड़, सावन, हरियाली सब देखा अपने जीवन में,

संस्कारों का गहना,आशीर्वाद की चुनरी ओढ़,

अंतर्मन में अपने सपनों को लेकर मुस्काती हूँ,

ये प्रकृति का प्रमाण जैसे ब्रह्माण्ड में सब समाया है,

 उसी तरह अपने परिवार के लिए मैं उस ब्रह्माण्ड-सी हूँI


समय की सुई कभी न रूकती है,कभी न थकती है,

जीवन का कड़वा रस पीकर भी सब कुछ सहती है,

हर पल दुःख सहकर सुख की खुशबू है फैलाती,

जब बह्मांड में (अपनों पर ) खतरा विकराल छाता है,

तब मेरा रौद्र रूप सामने आता है I


अपने आँचल से मैंने अपनी छाया दी अपनों को,

जीने न दिया जब दुष्टों ने अपनी करतूत दिखाई,

तब दुर्गा का अवतार बनकर मैं धरा पर आई,

हाँ मैं ब्रह्मांड –सी हूँ, हाँ मैं ब्रह्मांड –सी हूँI


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