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Mukta Sahay

Abstract

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Mukta Sahay

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मैं और हिंदी साथ-साथ

मैं और हिंदी साथ-साथ

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मेरी हर एक सोच का आकार है हिंदी

मेरे हर एक पल का आधार है हिंदी।


मेरे हर एक अनुभव का उद्गार है हिंदी

मेरे हर एक कण की अस्ती है हिंदी।


मेरा मान और सम्मान है हिंदी

मेरी आन और स्वाभिमान है हिंदी।


मेरी शान और अभिमान है हिंदी

मेरी जान और प्राण है हिंदी।


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