STORYMIRROR

Tinku Sharma

Abstract

2  

Tinku Sharma

Abstract

मैं और दुनिया

मैं और दुनिया

1 min
271

जहां में किस-किस का दिल रखूं,

खुद को खुश रखूं या सबको खुश रखूं।


रहता हूं खुद छोटे से मकान में,

ख़ुद को घर रखूं या सबको घर रखूं।


कड़वा हूँ मगर सच बोलता हूं ,

ख़ुद को कम रखूँ या सबको कम रखूँ।


इल्जाम है दगाबाजी का मुझ पर ,

खुद को सच रखूँ सबको सच रखूँ।


ना सुनता ना समझता कोई यहां पर,

सोचा क्यों ना वास्ता सबको कम रखूँ।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract