STORYMIRROR

Raja S Aaditya Gupta

Abstract

2  

Raja S Aaditya Gupta

Abstract

मैं और चाँद

मैं और चाँद

1 min
202

आज के सफ़र में

चाँद भी संग है मेरे।


वो आसमां से देख रहा

मैं जमीं से ताक रहा।


वो बादलों में छुप रहा

मैं पर्दा हटा के देख रहा।


वो मुस्कुराते हुए सवाल कर रहा

मैं हँसते हुए जवाब दे रहा।


वो कभी कभी आँख मिचौली कर रहा

मैं उसे खोजने की कोशिश कर रहा।


वो संगीत के तार छेड़ रहा

मैं उसे एक धागे में पिरो रहा।


वो अपनी चाँदनी को कविता सुना रहा

मैं उस कविता को अपने दिल में

उतार रहा।


वो अलविदा कह के चला गया

मैं उसके इंतजार में जाग रहा।



विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract