मात-पिता की शरण।
मात-पिता की शरण।
भाई मेरे अपने माता-पिता की शरण तुम जाइए ,
भाव बिगड़े सब सुधर जाएंगे।
चित्त पर जो चढ़ा मलिन आवरण ,
उनकी दृष्टि से सब उतर जाएंगे।
प्रेम की नदियां वे बहाते रहेंगें,
रिश्तों में घनिष्ठता बढ़ती जाएगी,
मंजिलें कठिन सही गर तुमको उन पर विश्वास हो,
मात-पिता की अंगुली पकड़, तुम को पार वे लगायेंगे।
अपने मन की उनसे न कुछ छुपाइये ,
राग को अनुराग में वे बदल डालेंगे,
भाई मेरे! उनके शरण तले रहने का वायदा करो,
मुश्किलें सर पर हो कितनी, रास्ता वे दिखायेंगें।
विषय वासना के तूफान में यदि तुम पड़े,
तुम, बिन उनके सहारे ना निकल पाओगे,
ज्ञान के नेत्र खोल वे तुमको,
इस भवसागर से तुम्हें निकाल पाएंगे।
अभी भी वक्त है तुम समझ जाइए,
वरना प्रेयश तले ही दब जाओगे,
भाई मेरे! मात-पिता की शरण में ही रहो,
श्रेयस का मार्ग "नीरज ",वे तुमको दिखला जाएंगे।
