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Kusum Lakhera

Inspirational Children

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Kusum Lakhera

Inspirational Children

मासूम बचपन ....

मासूम बचपन ....

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मासूम बच्चों को कल्पना के पंख

लगाकर उड़ने दो

उन्हें इंद्रधनुषी रंगो से खेलने दो !

उन्हें खेलने दो मैदान में ,

मिट्टी से

उन्हें सुनाने दो वो प्यारी सी कहानी !


जिसका सिर पैर हो न हो

उन्हें अपनी ही मस्ती में नाचने दो !

उन्हें बिन सुर ताल लय के गीत सुनाने दो !

उन्हें फूलों सा खिलने दो !

उन्हें तारों सा चमकने दो !

उन्हें नदिया सा बहने दो !

बेशक आसपास माली की भूमिका निभाते रहो,


नजर रखते रहो कि कहीं ये कुम्हला तो

नहीं रहे

कहीं ये किसी कारण मुरझा तो नहीं रहे

पर स्नेह से

प्रेम से इन्हें नैसर्गिक रूप से बढ़ने दो !

इन्हें बात बात पर इतना न डांटे कि

इनके भीतर की रचनात्मकता में आ जाए विकार

इन्हें ऐसे न झिंझोड़े कि लगे इन पर हो रहा अत्याचार !


इनके बचपने को पुचकारे

इनके बचपन को सँवारें…

इनके प्रश्नों के उत्तर दीजिए

कभी साथ मे आप भी बच्चों संग बच्चे बना कीजिए

सच उनकी कल्पना के पंखो से उन्हें उड़ने दीजिए

तुमसे ये न हो पाएगा ये ताना न दें बारम्बार !

बच्चों को दीजिए प्यार दुलार !


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