माँ
माँ
माँ तेरा नाम है उज्जवल, तेरा तप है अमृत
सहे असंख्य कष्ट बन ढाल, तेरे उपकार कैसे विस्मृत
तेरी गोदी में खेली मैं, तेरा दूध ने प्राण दिया
तेरे आँचल में पली मैं, हर खुशियां मेरे नाम किया
मुझे देकर सर्वस्व, किंचित भी पा मुस्कान दिया
मेरे पास ढेरों खिलौने, कुछ सपने अपने साथ लिया
माँ मेरी पहली गुरु, दिया अमिट ज्ञान का प्रकाश
आप बन मेरी संबल, किया जगत भ्रमों का नाश
आज भी तेरे आँचल, लगते खुशियों का आकाश
तू ही ईश्वर, तू ही परमात्मा, यह है मेरा विश्वास
मैं चाहे जितनी हो जाऊँ बड़ी
पर माँ तुम रहना मेरे साथ खड़ी।
