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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

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Vijay Kumar parashar "साखी"

Inspirational

"मां"

"मां"

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ममता की वो मूरत सबसे अच्छी सूरत

दुनिया में मेरी माँ है,

सबसे ही खूबसूरत


किसे चाँद चाहिए

किसे सितारे चाहिए

गर मेरी रजा पूछे तो,

मुझे सिर्फ़ मां चाहिए


मां यहां जब तक है

तब तक ही दुनिया है

मां तेरे बगैर भी क्या?

होती कोई दुनिया है


सबसे अच्छी सीरत

मां है, पवित्र नियत

मां मुझे तेरी जरूरत

बाकी सब देते, दर्द


सबके सब मतलबी

मां तू ही, मेरी नबी

तेरे बिना, न आकाश

नहीं मेरी कोई जमीं


जो करे, मां से मोहब्बत

जो लिखे मां को खत

ख़ुदा देता न उन्हें, दुःख

जो मां को देता है, सुख


सब हो सकते है, गलत

मां कभी न होती, गलत

जब मां का दिल, तड़पता

बेटे का कुछ-कुछ दुखता


सब चाहते है, यहां नभ

साखी तो चाहे, मां बस

मेरी मां ही मेरी इबादत

मेरी मां ही है, मेरा रब


जब में यहां पैदा हुआ

तूने इतना ख्याल लिया

कभी तू रातों को जागी

कभी जलाया तूने दीया


तेरी रहमत आगे तो,

छोटा है, एक दरिया

मां तूने तो यहां पर

ईश्वर को जन्म दिया


पर आजकल के बेटे

बहुओं के हुए है, चहेते

मां वृद्धाश्रम भेज रहे

पत्नी भक्त हो गये, बेटे


पर जो यहां जैसा करे

वो यहां पर वैसा भरे

वो बेटे खाते है, ठोकरें

जो मां को मारते, ठोकरें


बेटे कपूत सुने है

मां सुनी न कुमाता

कलेजा मांगे, दे देती,

मां ऐसी है, विधाता


जो करे मां की सेवा

वो सदा पाता मेवा

मां एक जिंदा खुदा है

मां बिना व्यर्थ पूजा है


मां का रख, तू ख्याल

रब करेगा तेरी संभाल

मां के चरणों में, जन्नत

इससे पूरी होगी, मन्नत



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