STORYMIRROR

Altaf Hussain

Abstract

4  

Altaf Hussain

Abstract

मां

मां

1 min
361

जब भी 

मां बोलता है कोई 

हमें याद आती है 

गोदी में मुझे सुलाती हुई

चुल्लहे पर रोटी पकाती हुई

दाल में नमक कैसा है 

चाय में चीनी ज्यादा है न ?


आदि आदि पूछती हुई 

मेरी मां

पता नहीं 

मेरे मन में 

कभी नहीं आती है 

कांधे पर पर्स लटका कर 

नौकरी करने जाती हुई 

मेरी मां


पर मां तो मां है 

चुल्लहे के सामने बैठी हो 

या काउंटर के सामने 

पर फिर भी 

अजीब लगती है 

मुझे काउंटर पर बैठी मां

ये हो सकता है 


मेरा संकीर्ण सोच 

पर फिर भी 

मां, मन कहता है 

दाल में नमक पूछती हुई

मां ही असली 

मां है।


विषय का मूल्यांकन करें
लॉग इन

Similar hindi poem from Abstract