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अक्षरश : हिंदी साहित्य Dg

Inspirational

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अक्षरश : हिंदी साहित्य Dg

Inspirational

माँ

माँ

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नदिया की बहती धार है माँ

पेड़ों की शीतल छाँव है माँ


उस माँ के बारे में क्या कह पाऊँगी

हर नन्हें क़दमों का सहारा है माँ,


नदिया की बहती धार है माँ

पेड़ों की शीतल छाँव है माँ


जिसकी गोदी में पलकर बड़े हुए

जिसके आँचल की ओढ़नी सदा ओट बनी


उस माँ के बारे में क्या कह पाऊँग

सदा तेरी आँखों का तारा है माँ,


नदिया की बहती धार है माँ

पेड़ों की शीतल छाँव है माँ


हम मिट्टी में खेले-कूदे हरदम माँ

कभी तूने हमको ना डाँटा माँ


माँ तेरे बारे में क्या कह पाऊँगी

तूने पल पल प्यार हम पर वारा माँ,


नदिया की बहती धार है माँ

पेड़ों की शीतल छाँव है माँ


सदा तेरे प्यार की हमको जरूरत है

मन में विश्वास आ जाता है

ज़ब सर पर हाथ तू रखती है माँ


तेरे बारे में क्या कह पाऊँगी

हर बच्चे का जीवन है माँ,


नदिया की बहती धार है माँ

पेड़ों की शीतल छाँव है माँ!

 


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