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सोनी गुप्ता

Abstract

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सोनी गुप्ता

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माँ तो ऐसी होती है

माँ तो ऐसी होती है

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माँ तो ऐसी ही होती है

तुम बिन ना होती सुबह

ना तुम बिन होती रात

दुख हो या हो सुख भी

कहते तुम से सारी बात

तुझसे ही घर में उजाला है


तुम बिन ना सोचा कभी

कैसा होगा यह जीवन

तू ही धरती है

तू ही आसमान हैै

तेरे बिना ना यह जहान

तेरी सूरत देेखकर ही

सुबह मेरी होती हैै


मेरे दुख मेंं तो तू भी 

रोती है

माँ तो ऐसी ही होती है

सुबह सेेे शाम कभी न थकती

चलती रहती कभी ना

रूकती है 

माँ तो ऐसी ही होती है

माँ तो ऐसी ही होती है।


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