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संदीप सिंधवाल

Abstract Inspirational

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संदीप सिंधवाल

Abstract Inspirational

मां मेरी मां

मां मेरी मां

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मां तेरा हाथ का स्पर्श एक कमल है

तेरे हाथ के आशीष से सब सफल है।


मेरा भाग्य तूने ही संवारा है

जन्म से मेरे हाथ की लकीरें तेरे ही नकल है।


तेरे लिए रहा मैं वही नादान छोटा सा

तुझे समझने की कहां मुझे अक्ल है।


सिर्फ तेरे ही दिल में बसी है मेरी सूरत 

दुनिया के लिए ये सूरत तो नवल है।


तू सिखाती रही मुझे दुनिया के उसूल

तेरी कही हर बात आज भी अमल है।


तुझे दुख ना दूं ऐसी शक्ति मुझे देना

क्योंकि मेरी मां में अंबे की शक्ल है।


पुत्र कुपूत हो जाता पर कुमाता नहीं

और दुनिया में एक यही सच अटल है।


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