STORYMIRROR

Anita Sharma

Inspirational

4  

Anita Sharma

Inspirational

माँ को क्या व्यक्त करूँ

माँ को क्या व्यक्त करूँ

1 min
329

माँ महज़ एक लफ्ज़ नहीं,

उसमें समाहित है संसार;


हर मुश्किल में ढाल बने,

खुदमें समेटे शक्ति अपार;


हर मुश्किल में हमें संभाले,

लिए ज़हन मे दर्द हज़ार;


सीने से लगा सुरक्षा देतीं,

और देती सपनो को विस्तार;


माँ होतीं है जीवनदायनी,

माँ का प्रेम निस्वार्थ निर्विकार;


अथाह सागर है माँ का आँचल,

वात्सल्य का झलकता है अम्बार;


दर्द अपना छुपाती हमें हँसातीं,

जीवनपर्यन्त बरसता उनका प्यार;


बिना शिकायत सब करतीं जातीं,

उनमें ना कोई छल ना है अहंकार;


माँ से देवालय लगता है घर,

माँ तो प्रत्यक्ष ईश्वर का अवतार;


माँ बिना अपना वजूद कहाँ पाते हम,

ये जीवन ही उनका दिया उपहार;


माँ के त्याग और प्रेम के आगे तो,

सदियों से नतमस्तक है जग संसार;


हर साँस के ऋणी हम है उनके,

माँ ही दे सुदृढ़ जीवन का आधार;


शब्दों में क्या व्यक्त किया जाए,

माँ के बिना सब कुछ बेकार।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational