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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

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Sumit. Malhotra

Abstract Action Classics

माँ के हाथ का स्वेटर

माँ के हाथ का स्वेटर

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माँ के हाथ का स्वेटर बचपन से पहन रहा हूँ, 

मैं चालीस साल का हो गया पर पहन रहा हूँ। 


माँ के स्वेटर में ममता का स्पर्श महसूस हुआ है, 

माँ के स्वेटर में मेरा बचपन सुहाना यार हुआ है। 


जब भी कोई कार्यक्रम में जाना ये पहन कर गए, 

स्वेटर पहन और मफलर बाँध कर सदा हम गए। 


मेरी मम्मी जी के हाथ का स्वेटर बहुत सुंदर भी, 

जो स्वेटर देखता तो तारीफ़ वो करते सभी भी। 


माँ के हाथ के स्वेटर पहन कर अच्छा लगता था, 

माँ के हाथ का स्वेटर पहन सो जाया करता था। 


जब -जब भी सर्दी आने वाली हुआ करती थी, 

मम्मी जी हम सभी के लिए स्वेटर बुनती थी। 


मम्मी जी सबके लिए रंगबिरंगे स्वेटर बुनती थी, 

रिश्तेदारों और पड़ोसियों के लिए बुनती थी। 


मम्मी के बनाये हुए स्वेटरों की प्रशंसा सब करते, 

मम्मी जी के बनाये स्वेटरों को प्रसिद्ध सब करते। 


कुछ अमीर दोस्त महंगे स्वेटर पहन कर आते रोज़, 

सबके पहने हुए स्वेटरों का मज़ाक थे बनाते रोज़। 


लेकिन वो सब भी हैरान और परेशान हुआ करते, 

जब -जब भी मेरे मम्मी जी के बनाये स्वेटर देखते।


सबसे बड़ी बात जो रंग उन्हें अच्छा लगता कभी, 

वो रंग के स्वेटर बुनकर पहना दिया करती तभी।


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