माँ बिन जीवन नहीं है
माँ बिन जीवन नहीं है
माँ से जीवन और जीवन की सरगम
माँ की छाया बच्चों पर रहती हरदम
तिनका -तिनका जोड़ वो बच्चों पर लुटाती है
स्नेह की बारिश से तन-मन को भिगोती है।
उसके होने से घर का हर कोना उज्ज्वल
न होने पर आँखें होती जल-थल
जीवन का दर्शन शुरू माँ से होता है
माँ के आदर्शों पर ही जीवन निर्धारित होता है
माँ जो नहीं तो कुछ भी तो नहीं है
माँ के बिन जीवन का अस्तित्व नहीं हैं
जीवन का किनारा माँ ,माँ ही धारा है
अंतिम साँसों में माँ का ही बसेरा है
