माँ अम्बे दे दो अपनी तलवार
माँ अम्बे दे दो अपनी तलवार
धरती पर आतताइयों का दिन पर दिन बढ़ रहा अत्याचार !
माँ अम्बे हमें दे दो अपनी तलवार
नाश करें हम उन दु:शासन का जो घर में छुप कर बैठे हैं,
जो खुद की ही मान- मर्यादा को ताक पे रख कर अपनी औकात भूले हैं,
वो भूल गए हैं माँ- बहन पहचानना !
वो भूल गए अपनी सीमा में रहना!
वे भूल गए अपनी गरिमा को!
वे भूल गए सनातन संस्कृति की विरासत को!
वे आज केवल हिंसा और अन्याय का मार्ग पे खुद को धकेलें हैं!
धरती पर आतताइयों का बढ़ रहा क्रूर बर्बर व्यवहार
हे माँ शक्ति! दे दो हमें गदा, तिर- तलवार
हे माँ काली! दे दो हमें खड्ग-ढाल
हे माँ दुर्गे दे दो हमें शक्ति अपार
या दुष्टों के संहार हेतु लो तुम कली काल में विकराल अवतार।
माँ जगदम्बे तू एक फिर दिखाओगे अपना चमत्कार
हर लो जग की बाधा अपार ।
