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Dinendra Das

Inspirational

4  

Dinendra Das

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पूर्व का फल

पूर्व का फल

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 "पापा जी! आप क्या कर रहे हैं?"

 " बेटा, पेड़ लगा रहा हूं ।"

"पर... पापा जी! आप तो... ! एक महीने बाद सेवानिवृत्त हो रहे हैं, फिर हम सब यहां से चले जाएंगे, पेड़ लगाने से क्या मतलब ? यहां कौन रहेगा और पेड़ में कौन पानी डालेगा?"  

"मुझे इसकी चिंता नहीं है, मैं अपना कर्तव्य निर्वाह कर रहा हूं । इसकी रक्षा के लिए कोई न कोई इसका वारिस जरूर आ जायेगा। देखो तुम लोग अभी आम खा रहे हो, वह आम भी किसी ने वर्षों पहले लगाया था। वैसे ही मेरे द्वारा लगाये गये आम कोई न कोई खायेगा। पेड़ फल ही नहीं देता है, फल के साथ ऑक्सीजन भी तो देता है।इसलिए हमें चाहिए अपने जीवन में जितना हो सके प्राण दायिनी पेड़ लगाये।"

 भारतीयजी बी.एस.पी.( भिलाई स्टील प्लांट ) के सेक्टर 9 में 10 नंबर कमरे पर रहते थे। कमरे के सामने जगह पर आम ,अमरूद, सीता आदि के पेड़ लगाए हुए थे। वैसे भी वे अन्यत्र जगह हजारों पेड़ पर लगा चुके थे। वे सेवा निवृत्ति के पश्चात अपने गांव चंदखुरी चले गये।   

 कुछ वर्ष बाद उनके बेटा भरत की नियुक्ति बी.एस.पी. प्लांट में ही हो गई। संयोग से वही जगह वही कमरा मिला। कुछ साल बाद भारतीयजी अपने बेटे के यहां भिलाई गये। तो देखा घर में सब लोग आम खा रहे थे। आश्चर्यचकित होकर भारतीयजी ने पूछा, "बेटा, अभी तो आम बाजार में आया नहीं फिर आम कहां से खा रहे हो?" 

बेटे ने जवाब दिया "आपके द्वारा ही दस वर्ष पहले लगाये गये आम हम सब खा रहे हैं।"

संदेश - वर्तमान में सत्कर्म का बीज बोयेंगे तो भविष्य में हमें सुंदर फल मिलेगा।।


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