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Pinky Dubey

Tragedy


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Pinky Dubey

Tragedy


माहामारी का जाल

माहामारी का जाल

1 min 224 1 min 224

दुनिया घिर गइ है माहामारी के जाल मे

मर रहे लोग

रोज़ हो रही है मौत

बिलख़ कर रोह रहे हैं लोग

कैसा जाल फैालाया है

इस करोना ने

इस मुसिबत के घड़ी मे लोग

हो रहे हैं स्वार्थी

देख रहे है अपना स्वार्थ

ऊनको लगता है जिंदगी का कोई मोल नही

ऊनसे पुछो जिसने अपनो को खोया है

दुनिया मे पैसे फिर कमाए जा सकते हैं

मगर इन्सान को लौटा नही सकते

हे इन्सान अपना स्वार्थ छोड़ इन्सान की कीमत समझो

उन पैसो का क्या मोल जो किसी के घर को तोड़ कर बना हो

ऐ इन्सान दूसरे इन्सान को समझ

खुद जी और दूसरे को भी जीने दे।


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