माॅं शारदे तुझे मनाऊं मैं
माॅं शारदे तुझे मनाऊं मैं
माॅं शारदे तुझे मनाऊं मैं,
वो भाव कहां से लाऊं मैं।
माॅं शारदे तुझे सुनाऊं मैं,
वो गीत कौन सा गाऊं मैं।
माॅं शारदे तुझे चढ़ाने को,
नैवेद्य कहां से लाऊं मैं।
माॅं तुझे अर्पित करने को,
श्वेत पुष्प कहां पाऊं मैं।
माॅं तू तो भावों की भूखी है,
माॅं कैसे तुझे रिझाऊं मैं।
माॅं तेरा ही बालक हूं मैं,
दिव्यज्ञान तुझसे ही पाऊं मैं।
