STORYMIRROR

Rishabh Sharma

Abstract

1  

Rishabh Sharma

Abstract

MAA-BAAP KA PYAAR

MAA-BAAP KA PYAAR

1 min
191

आसमान के सितारे भी कम पड़ गए

माँ-बाप के सहारे के आगे,

खुद ईश्वर का सहारा भी फीका है

माँ-बाप के सहारे के आगे।


तरीके अलग अलग हैं सबके

अपनों को मनाने के,

पर रूठने का ढंग तो वही

नज़रिये जुड़ा है सबके,

पर सबकी निगाहें तो वही।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Abstract