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Ravi Ranjan Goswami

Abstract

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Ravi Ranjan Goswami

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लम्हा लम्हा जिंदगी

लम्हा लम्हा जिंदगी

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हम मंसूबे बनाते रहे। 

 लम्हे फिसलते रहे।

 काम कर गयी जिंदगी। 

लम्हा लम्हा जिंदगी। 


एक लम्हा नामालूम गुजरा 

एक लम्हा गुजरता नहीं ।

कोई बिगड़ा लम्हा,

बिगाड़ देता जब वक्त की चाल।


जिंदगी बेठौर सी हो जाती है।

कोई लम्हा उम्मीद भरा मिल जाता है,

वो कहता है वक्त बड़ा सख्त है,

आओ कुछ हसीन ख्वाब बुनते हैं।


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