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Ruchika Rai

Abstract

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Ruchika Rai

Abstract

लेखन

लेखन

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कोरे पन्ने पर लिखूँ मैं दिल के जज़्बात,

होंठों से जो बयान न हो वो सारी बात,

लिखूँ मन को उलझन को अपने सारी,

कैसे कैसे कहाँ लगे मन को है आघात।

अपने मन के अन्तर्द्वदों को मैं लिखूँ,

बेवजह के द्वंद्व से बचना कैसे ये लिखूँ,

लिखूँ मन में चल रहे उलझन का कारण,

लिखकर मैं उनसे निबटना सदा सीखूँ।

लिखूँ क्रांति का अलख जगाने की बातें,

लिखूँ दुश्मन द्वारा की जा रही घातें,

लिखूँ दृढ़निश्चयी बनने की सारी राहें,

लिखूँ सजग प्रहरी बनकर कटी जो रातें।

कोरे पन्ने पर लिखूँ मैं रिश्तों की नीयत,

छलने को आतुर हैं उनकी शख्सियत,

लिखूँ नकाबों में छुपे चेहरे के सारे गुण,

या फिर उनकी छिपी हुई असलियत।

कोरे पन्ने पर लिखूँ मैं सारे ही हालात।


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