STORYMIRROR

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

4  

Ratna Kaul Bhardwaj

Inspirational

लाज़िम है खुद से रूबरू होना

लाज़िम है खुद से रूबरू होना

1 min
306

उमंगें कुछ खो सी गई है

आशियाँ भी उदास है

पर कुछ तो है पुरवाई में

अभी भी एक मिठास है


नहीं रही मदमस्त हवाएं

फिजाएं भी रूखी रूखी

पर ज़िन्दगी में रुसवाई नहीं

एक नन्ही सी आस है


बदलते रहते हैं रंग डंग 

कुछ सुहाते तो कुछ नहीं

कुछ समझ से परे होकर भी

जगाती मीठी प्यास है


नहीं ज़रूरी सबको समझना

बावलापन भी प्यारा एहसास है

आईने में अब अपनी परछाई भी

लगती है कुछ खास है


औरों जैसा होना ज़रूरी नही

लाज़िम है खुद से रूबरू होना

पागल, दीवाना लोग समझते रहे

बेखुदी आने लगी अब रास है।


Rate this content
Log in

Similar hindi poem from Inspirational